दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का

वक्त नहीं अब, हास परिहास उपहास का

कदम बढाकर मंजिल छु लुं, हाथ उठाकर आसमाँ

पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का

बस एक बार उठ जाऊं, उठकर संभल जाऊं

दोनों हाथ उठाकर, फिर एक बार तिरंगा लहराऊं

दुआ अंतिम रब से, कण अंतिम अहसास का

कतरा अंतिम लहू का, क्षण अंतिम श्वास का

बस एक बुंद लहू की भरदे मेरी शिराओं मे

लहरा दूँ तिरंगा मे इन हवाओं मे

फहरा दूँ विजय पताका चारों दिशाओ मे

महकती रहे वतन की मिटटी, गुँजती रहे गुँज जीत की

सदियों तक इन फिजाओं मे

सपना अंतिम आँखों मे, ज़स्बा अंतिम साँसों मे

शब्द अंतिम होठों पर, कर्ज अंतिम रगों पर

बुंद आखरी पानी की, इंतज़ार बरसात का

पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का

अँधेरा गहरा, शोर मंद

साँसें चंद, होसलां बुलंद,

रगों मे तुफ़ान, जस्बों मे उफान

आँखों मे ऊँचाई, सपनो मे उड़ान

दो कदम पर मंजिल, हर मोड़ पर कातिल

दो साँसें उधार दे, कर लु मे सब कुछ हासिल

जस्बा अंतिम सरफरोशी का, लम्हा अंतिम गर्मजोशी का

सपना अंतिम आँखों मे, ज़र्रा अंतिम साँसों मे

तपिश आखरी अगन की, इंतज़ार बरसात का

पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का

फिर एक बार जनम लेकर इस धरा पर आऊं

सरफरोशी मे फिर एक बार फ़ना हो जाऊं

गिरने लगूँ तो थाम लेना, टूटने लगूँ तो बांध लेना

मिट्टी वतन की भाल पर लगाऊं

मे एक बार फिर तिरंगा लहराऊं

दुआ अंतिम रब से, कण अंतिम अहसास का

कतरा अंतिम लहू का, क्षण अंतिम श्वास का !

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